कंप्यूटर कक्षा के ब्लैकबोर्ड पर चॉक से लिखे चार शब्द: "MISS YOU COMPUTER CLASS"।
तीन महीने पहले जिस कमरे में बच्चे झिझकते हुए बैठे थे, आज उसी कमरे से विदा लेते वक़्त उनके मन में यही भाव था। 11 अक्टूबर को शिक्षा एवं सशक्तिकरण सेवा संस्थान सिंगारपुर द्वारा संचालित निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण का 3 माह का बैच सफलतापूर्वक पूरा हुआ। परीक्षा हुई, मुस्कुराहटें बाँटी गईं, और बच्चों को स्नेह के साथ विदा किया गया।
कंप्यूटर कक्षा में प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी
तीन महीने, एक नई शुरुआत
इन तस्वीरों को ज़रा ध्यान से देखिए। कॉपी-पेन के साथ झुके हुए चेहरे, कुछ समझने की कोशिश करती आँखें, और साथ बैठे साथियों का हौसला। इन बच्चों के लिए कंप्यूटर कभी "दूसरों की चीज़" हुआ करता था। आज वे उसे खुद चला सकते हैं।
इन तीन महीनों में उन्होंने सीखा:
- कंप्यूटर के मूल भाग और उनका उपयोग
- हिंदी और अंग्रेज़ी टाइपिंग
- MS Word में पत्र और आवेदन बनाना
- इंटरनेट का सुरक्षित और सही उपयोग
यह सिर्फ़ कंप्यूटर सीखना नहीं था। यह अपने आप पर भरोसा करना सीखना था। जो बच्चा आज टाइप करके अपना आवेदन खुद लिख सकता है, कल वह अपने सपनों का रास्ता भी खुद बना सकता है।
प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों के साथ समूह तस्वीर
अब कंप्यूटर के साथ कोचिंग भी
बच्चों की लगन देखकर हमने तय किया कि यह सिलसिला रुकना नहीं चाहिए। इसलिए अब कंप्यूटर के साथ कोचिंग कक्षाएँ भी शुरू कर दी गई हैं। पहल का विस्तार हो रहा है, और जैसे-जैसे बच्चे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे बैठने की जगह, किताबों और संसाधनों की ज़रूरत भी बढ़ेगी। यहीं हमें आपका साथ चाहिए।
एक सवाल, जो हम सबसे पूछना चाहते हैं
गरबा, क्रिकेट टूर्नामेंट और अन्य उत्सव जैसे आयोजनों के लिए हमारा समाज खुले दिल से चंदा देता है। यह बहुत अच्छी बात है, उत्सव हमारी संस्कृति की जान हैं। हम उनका सम्मान करते हैं।
पर मन में एक सवाल उठता है: जब बात बच्चों की पढ़ाई की आती है, तो हम उतनी ही उदारता से आगे क्यों नहीं आते?
उत्सव कुछ दिन की ख़ुशी देता है, पर शिक्षा बच्चे की पूरी ज़िंदगी बदल देती है।
सोचिए, आपके दिए थोड़े से सहयोग से कोई बच्चा पहली बार कंप्यूटर पर अपना नाम टाइप करता है। वह पल उसके लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता।
🙏 सदस्यता अभियान: आप भी जुड़िए
हमारी शुरुआत सिंगारपुर से हुई है, पर हमारा सपना पूरे देश के बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने का है। इसलिए हम चाहते हैं कि देश के कोने-कोने से अधिक से अधिक लोग इस संस्था से जुड़ें। संस्था किसी एक गाँव या कुछ लोगों की नहीं, पूरे समाज और पूरे देश की है।
जितने ज़्यादा सदस्य, उतनी मज़बूत पहल, और उतने ज़्यादा बच्चों तक शिक्षा पहुँचेगी।
कौन बन सकता है सदस्य? शिक्षा के प्रति सच्चा भाव रखने वाला भारत का हर नागरिक: अभिभावक, शिक्षक, युवा, विद्यार्थी, नौकरीपेशा या व्यवसायी, चाहे वह गाँव में रहता हो, शहर में या देश के किसी भी राज्य में।
सदस्यता की जानकारी और फॉर्म के लिए नीचे दिए बटन से सीधे WhatsApp पर संदेश भेजें, या संस्था कार्यालय में संपर्क करें।
📚 सामग्री दान: जो आपके लिए पुराना है, वह किसी के लिए सपना है
आपके घर या दफ़्तर में रखी जो चीज़ें अब आपके काम की नहीं रहीं, वे किसी बच्चे की पढ़ाई का सहारा बन सकती हैं। पुरानी (इस्तेमाल की हुई) लेकिन चालू हालत की सामग्री भी हमारे लिए अनमोल है:
- कंप्यूटर (चालू हालत में): एक कंप्यूटर से कई बच्चे सीख सकते हैं
- किताबें: जो आपके पढ़ लेने के बाद अलमारी में रखी हैं
- टेबल और कुर्सी: ताकि कोई बच्चा आराम से बैठकर पढ़ सके
- बोर्ड और चॉक: जिनसे शिक्षक बच्चों को पढ़ा सकें
एक कुर्सी, एक किताब, एक चॉक: इतना-सा सामान किसी बच्चे की ज़िंदगी बदल सकता है।
🧾 आर्थिक सहयोग
अभी संस्था ऑनलाइन दान स्वीकार नहीं कर रही है। जो साथी आर्थिक सहयोग देना चाहें, वे संस्था कार्यालय में आकर रसीद कटवाकर अपना सहयोग दे सकते हैं।
संपर्क करें
अशोक बांधे, अध्यक्ष
शिक्षा एवं सशक्तिकरण सेवा संस्थान, सिंगारपुर
📞 मोबाइल: 9907637131
💬 WhatsApp: सदस्य बनना चाहता/चाहती हूँ💬 WhatsApp: सामग्री दान करना चाहता/चाहती हूँ📞 सीधे कॉल करेंशिक्षित बच्चे, सशक्त भारत
देश का भविष्य उसके बच्चों के हाथ में है। जब हर गाँव और हर शहर का बच्चा पढ़ेगा, तभी भारत सच में आगे बढ़ेगा। यह काम किसी एक संस्था का नहीं, हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।
हमारी अपील
इस पोस्ट को अपने परिवार, मित्रों और व्हाट्सऐप समूहों में, देश में जहाँ भी आपके परिचित हों, साझा कीजिए। हो सकता है आपका एक शेयर किसी ऐसे व्यक्ति तक पहुँच जाए जो इसी मौके का इंतज़ार कर रहा हो। एक सदस्य से कई बच्चों का भविष्य जुड़ा होता है।
आज एक कदम उठाइए, कल किसी बच्चे की दुनिया बदल जाएगी।
आइए, मिलकर देश के हर बच्चे को पढ़ने का अवसर दें।
— अशोक बांधे, अध्यक्ष
शिक्षा एवं सशक्तिकरण सेवा संस्थान, सिंगारपुर

